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Saturday, 4 February 2012

प्रार्थना जिन्दगी से

जिंदगी एक बार फिर
तुझे बुलाना चाहती हूँ
शिकायत नहीं हें तुझसे
पर जो छूट गया है न !
बस उसे जीना चाहती हूँ.
रह गए जो खिलोने अनछुए
उन खिलौनों का छूना चाहती हूँ .

वो गाँव, वो घर, वो पेड़ 
पेड़ पर वो सावन के झूले
वो बचपन वो सखियाँ साथी
जो बरसों से ना मिलें 
बहुत कुछ पाकर भी 
सब कुछ छूट गया
सावन के उन झुलौ पर
झुलना चाहती हूँ 

जिंदगी एक बार फिर
तुझे बुलाना चाहती हूँ 
------- गोगी--------

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