जिंदगी एक बार फिर
तुझे बुलाना चाहती हूँ
शिकायत नहीं हें तुझसे
पर जो छूट गया है न !
बस उसे जीना चाहती हूँ.
रह गए जो खिलोने अनछुए
उन खिलौनों का छूना चाहती हूँ .
वो गाँव, वो घर, वो पेड़
पेड़ पर वो सावन के झूले
वो बचपन वो सखियाँ साथी
जो बरसों से ना मिलें
बहुत कुछ पाकर भी
सब कुछ छूट गया
सावन के उन झुलौ पर
झुलना चाहती हूँ
जिंदगी एक बार फिर
तुझे बुलाना चाहती हूँ
------- गोगी--------
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