आपका हार्दिक स्वागत है

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Monday, 25 March 2019


ना जानें क्यों मुझे आज 
तन्हा तन्हा सा लगता है ।। 
इस भीड़ भरे माहोल  में 
सूना सूना सा लगता है ।। 

अपनों के बीच होकर भी
पराया पराया  लगता है ।। 
चाँद तारों भरी रात में भी
अमा अमा सा लगता है  ।। 

देख आकाश की  और कुछ
बतियाने का दिल करता है ।। 
बन के बदरिया उसी के संग 
उड़ जाने को दिल करता है ।। 

अपनों को छोड परायों को 
अपनाने का दिल करता है।। 
यह  रीत बनाने वालों को
गले लगाने को दिल करता है ।। 
-------गोगी------ 

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