अरमानों के ऊँट
पालता चल
बणजारा हैं
तू जीवन का गीत
सुनाता चल
तू जीवन का गीत
सुनाता चल
मत तलाश
कोई ठौर ठिकाना
अपना घर
अपना घर
चलता चल
भटकन ही तेरा
है मुक्कदर
समझ जरा
गर ठौर ठिकाना
मिल जायगा
तेरा वजू़द
ही इस दुनियाँ से
हिल जाएगा
बिना भटके
बता कैसे बंजारा
कहलायेगा
ही इस दुनियाँ से
हिल जाएगा
बिना भटके
बता कैसे बंजारा
कहलायेगा
-असि बापू -
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