मैं संख्या
और तुम शून्य
जुड़ो जब मुझसे
तो बढ़ा देती हो
मान मेरा
बिन तुम्हारे मैं एक
जुडो तुम झुससे
तो हो जाऊं
मै दस बीस तीस चालीस
तुम शून्य अपरिमित
मान बढ़ाती रहती हो मेरा
नही जुड़ो तो
मैं संख्या और
तुम शून्य
मान तुम्हारा भी
बढ़ता है
मुझसे जुड़ने से
मैं नही तो तुम
केवल शून्य
संख्या के साथ ही
मान है तुम्हारा
संग छुटा
तो तुम केवल शून्य
कोई मान नहीं तुम्हारा
तुम सिर्फ शून्य हो संख्या बिना
-- क्योकि
सामाजिक आर्यभट्टों नें
नहीं दिया है कोई हक
किसी दुसरे
अंक में समाकर
अपना मान बढ़ाने का
----- अभय असि ----
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