माँ से शिकायत
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माँ !
काहे
तुम भी
सो गई थी
सुभद्रा जैसी
जब बाबा सीखा
रहे थे तुम्हे इस
जीवन कुरुक्षेत्र के
चक्रव्यूह भेदन कला
माँ
मै भी
जग की
रची इस
व्यूह रचना
में फस जाता हूँ
जैसे की अभिमन्यु
इस अधूरी विद्या से
खूब कष्ट सहे उसने
माँ
मुझे
भी देखो
अधमरा
कर रखा है
इस कुरुक्षेत्र
में असंख्य कौरवो
दू:शासनों, दुर्योधनों
और कईं शकुनियों ने
माँ
कैसे
बताऊं
अब तुम्हैं
मैं, के कितना
मुश्किल होता है
मर मर के जीना
जीवन कुरूक्षैत्र में
कौरवो,शकुनियों के बीच
....अभय'असि'
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