मै गुरु हूँ पर द्रोण नहीं कि........................
अंगूठा कटवा लूँ
गुरु दक्षिणा में
किसी भील बालक का
मै जानता हूँ
भील के अंगूठे की अहमियत |
मै गुरु हूँ पर द्रोण नहीं कि......................
उपेक्षा करूँ
किसी प्रतिभा की
मै जानता हूँ
उपेक्षित प्रतिभाओ
को मिला लेता है दुश्मन
अपने खेमे में ,देकर अच्छी कीमत |
मै गुरु हूँ पर द्रोण नहीं कि.........................
अपनी आँखें मूंद लूँ
जब बहु-बेटी
कि जा रही हो निर्वस्त्र
मै जानता हूँ
क्या होती है ,बहु -बेटी की अस्मत |
'असि'
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